क्या शरीर में सफेद दाग होना बीमारी है?, जानने के लिए पढ़िए पूरी ख़बर

ख़बरें अभी तक। आज की इस ख़बर में हम आपको सफेद दाग के बारें में बताएंगे…..क्या है सफेद दाग?….सफेद दाग एक ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर है। जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) पर उलटा असर यानी शरीर को ही नुकसान पहुंचाने लगती है। सफेद दाग के मामले में खराब इम्यूनिटी की वजह से शरीर में स्किन का रंग बनाने वाली कोशिकाएं मेलानोसाइट(melanocyte)मरने लगती हैं। इससे शरीर में जगह-जगह उजले धब्बे बन जाते हैं। सफेद दाग को वीटिलिगो, ल्यूकोडर्मा, फुलेरी और श्वेत पात नाम से भी जाना जाता है।

सफेद दाग के लक्षण……

जब स्किन का रंग हल्का पड़ना शुरू हो जाए और उस हिस्से के बाल भी सफेद होना शुरू हो जाएं तो समझ जाइए कि यह सफेद दाग है। अगर एक जगह पहले से ही सफेद दाग बन गया हो और उसके बाद कहीं चोट, खरोंच या ठोकर लगती है और वह जगह भी सफेद होने लगे तो मान लेना चाहिए कि सफेद दाग शरीर में तेजी से फैल रहा है। इन सफेद दागों के ऊपर कोई खुजली, दर्द और स्राव (सेक्रिशन) नहीं होता और संवेदनशीलता भी सामान्य रहती है। हालांकि पसीने और ज्यादा गर्मी से जलन पैदा हो सकती है।

सफेद दाग न फैले इसके लिए आमतौर पर तीन दवाएं दी जाती हैं: मिनी स्टेरॉयड पल्स(mini steroid pulse), लिवामिसोल (levamisole), एजोरान (Azoran)। मिनी स्टेरॉयड पल्स से हालांकि कई बार वजन बढ़ जाता है। स्किन का रंग वापस लाने के लिए बाबची सीड्स (babchi seeds-8 methody psoralence), एपिफरमल फाइब्रोकास्ट ग्रोथ फैक्टर (epiphermal fibroblast growth factor), कैल्सिन्युरिन इन्हिबिटर ऑइंटमेंट (calcineurin inhibitor ointment), वीक कॉर्टिको स्टेरॉयड क्रीम (weak cortico steroid cream), ऑर्गन प्लैसेंटल एक्सट्रैक्ट क्रीम (organ placental extract cream)। फोटो थेरपी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

इसके तहत सूर्य की किरणों UVA और नैरोबैंड UVB का इस्तेमाल स्किन का रंग फिर से सामान्य बनाने के लिए किया जाता है। इस थेरपी का साइड इफेक्ट यह है कि इसे करते हुए सावधानी न बरती जाए तो स्किन काली पड़ सकती है। यूं यह बीमारी 1000-1500 रुपए महीने के खर्च के हिसाब से ठीक की जा सकती है। ठीक होने में कितना समय लगेगा, यह इस पर निर्भर करता है कि शरीर का कितना भाग प्रभावित है? यह अहम है कि सफेद दाग के असर में आने के बाद कोई शख्स कितनी जल्दी सफेद दाग एक्सपर्ट के पास ट्रीटमेंट के लिए पहुंचता है।

सफेद दाग क्यों होता है…..

सफेद दाग अलग-अलग लोगों में अलग-अलग वजहों से हो सकता है, कुछ लोगों में यह सफेद दाग से पीड़ित पैरंट्स से हो सकता है। हालांकि ऐसे मामले 2 से 4 फीसदी ही होते हैं। बच्चों में यह ज्यादातर क्रॉनिक इन्फेक्शन की वजह से यानी लगातार गला खराब होने, पेट खराब होने और अनीमिया की वजह से होता है। इन बीमारियों के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाओं से बॉडी की इम्यूनिटी प्रभावित होती है और ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर पैदा होता है। बड़े लोगों में ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर की वजह से थाइरॉयड की समस्या पैदा हो सकती है, जिससे सफेद दाग होने की आशंका रहती है।

एलोपेशिया एरियाटा (alopecia areata) भी एक ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर है, जिसमें सिक्के के रूप में शरीर से बाल जाने लगते हैं। यह भी सफेद दाग की वजह बन सकता है। कुछ मामलों में सफेद दाग मस्से या बर्थ मार्क (halo nevus) की वजह से हो सकता है। मस्सा या बर्थ मार्क बच्चे के बड़े होने के साथ-साथ आसपास की स्किन का रंग खाना शुरू कर देता है। शरीर के एक हिस्से में शुरू होकर यह दूसरे हिस्से पर भी फैल सकता है। 20-30 फीसदी लोगों को सफेद दाग इसी तरह होता है। इसके अलावा केमिकल ल्यूकोडर्मा (chemical leucoderma) भी हो सकता है, खास तौर से उन औरतों में, जो चिपकाने वाली बिंदी का लगातार इस्तेमाल करती हैं। इससे चेहरे पर सफेद दाग होने का खतरा रहता है।

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