MMDU मुलाना के सिविल इंजीनियरिंग विभाग ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत चलाया हरित अभियान

महार्षि मारकंडेश्वर (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), मुलाना के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा इंस्टीट्यूशनल सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (ISR) पहल के अंतर्गत ग्रीन अर्थ ऑर्गेनाइजेशन, कुरुक्षेत्र के सहयोग से वन महोत्सव–2026 कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं स्थानीय समुदाय में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास तथा वृक्षारोपण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। यह कार्यशाला भारत सरकार के “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के समर्थन में आयोजित की गई।
यह कार्यशाला विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री द्वारा प्रारंभ किए गए राष्ट्रीय अभियान के अनुरूप आयोजित की गई, जिसके अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया जाता है। यह पहल माँ और प्रकृति की पालन-पोषण करने वाली भूमिका का प्रतीक है तथा पर्यावरण संरक्षण एवं सतत जीवनशैली के महत्व को रेखांकित करती है।


कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. कुलबीर नैन, एसोसिएट प्रोफेसर, सिविल इंजीनियरिंग विभाग एवं कार्यशाला के सह-संयोजक के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने वन महोत्सव के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वृक्षारोपण जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने, वायु गुणवत्ता में सुधार करने तथा जैव विविधता के संरक्षण का सबसे प्रभावी माध्यम है।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्रो. वनीता अग्रवाल, विभागाध्यक्ष, सिविल इंजीनियरिंग विभाग एवं कार्यशाला की संयोजक ने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने तथा देश के हरित आवरण को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय अभियानों में सहभागी बनने का आह्वान किया।


कार्यक्रम का मुख्य व्याख्यान प्रख्यात पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. नरेश भारद्वाज, निदेशक, ग्रीन अर्थ ऑर्गेनाइजेशन तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत पंजाब एवं हरियाणा की स्टेट एक्सपर्ट अप्रेज़ल कमेटियों के सदस्य द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने अपने 25 वर्षों से अधिक के अनुभव के आधार पर सतत अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता, सर्कुलर इकोनॉमी, पर्यावरण संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने में वनीकरण की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार अपनाकर पर्यावरण के सच्चे दूत बनने का आह्वान किया।
कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण डॉ. नरेश भारद्वाज द्वारा आयोजित पौधारोपण का व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र रहा। इस दौरान प्रतिभागियों को वैज्ञानिक विधि से पौधे लगाने की तकनीक तथा उनके दीर्घकालिक संरक्षण एवं देखभाल के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने पौधों की नियमित सिंचाई, मल्चिंग, पोषक तत्वों का प्रबंधन, कीट एवं पशुओं से सुरक्षा तथा समय-समय पर निगरानी रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण तभी सफल माना जाएगा जब लगाए गए पौधों का निरंतर संरक्षण और संवर्धन किया जाए।


कार्यक्रम के दौरान “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान पर विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को अपनी माताओं के सम्मान में एक पौधा लगाने तथा उसकी नियमित देखभाल करने के लिए प्रेरित किया गया। सभी प्रतिभागियों ने वृक्षारोपण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरणीय सततता को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प भी लिया।


इस अवसर पर डॉ. नरेश भारद्वाज को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए विश्वविद्यालय की ओर से पौधा स्मृति-चिह्न एवं प्रशंसा-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में विभाग के शिक्षकों, विद्यार्थियों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों तथा ग्रीन अर्थ ऑर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें मुख्य वक्ता, विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजन समिति एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति सफल आयोजन हेतु आभार व्यक्त किया गया।
यह कार्यशाला विश्वविद्यालय की पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण रही तथा सभी प्रतिभागियों को “एक पेड़ लगाएँ, भविष्य बचाएँ” का संदेश देते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया।