असम की इस घाटी में है पक्षियों का सुसाइड पॉइंट, जहां हर साल बड़े पैमाने पर पक्षी करते हैं आत्महत्या

ख़बरें अभी तक। रविवार का दिन वैसे तो आराम करने वाला होता है लेकिन रोजाना ऑफिस जाने वाले कई लोग संडे की छुट्टी के दिन किताबे पढ़ने के शौकिन होते है और कई तरह की नौबल और किताबे पढ़ते है कईयों को कहानियां पढ़ने का शौक भी होता है। लेकिन आज हम अपने पाठकों को एक ऐसी रहस्यमी जगह के बारें में बताएंगे जिससे उनका संडे और मजेदार बन जाएगा और साथ में उन्हें एक ऐसी रहस्यमी जगह के बारें में भी पता चल जाएगा जो शायद किसी किताब में ना मिले। जी हां तो शुरु करते है अपनी इस रहस्यमयी जगह के बारे में……

हम बात करेंगे रहस्यमयी जटिंगा वैली के बारें में जोकि दक्षिणी असम के दीमा हसाओ जिले की पहाड़ी घाटी में बसा एक गांव है। यहां हर साल बड़े पैमाने पर पक्षी आत्महत्या करते हैं। जी हां यह एक सत्य घटना है। यहां पक्षी आत्महत्या करते हैं हुए देखे जा सकते है। वैसे तो असम अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और सांस्कृतिक विरासत के कारण सैलानियों के लिए प्रिय पर्यटन स्थल माना जाता है। लेकिन असम में एक ऐसी जगह भी है जहां परिंदे आत्महत्या करते हैं और ये जगह जतिंगा नाम से जानी जाती है।

पिछले 100 सालों से प्रत्येक वर्ष असम की छोटी सी जगह जटिंगा में आकर हजारों परिंदे आत्महत्या करते हैं। मानसून के बाद अक्सर सितंबर और नवंबर के महीनों में पक्षियों की 44 प्रजातियां जतिंगा में आती हैं और शाम 6 से 9 बजे के बीच ये परिंदे बिलकुल व्याकुल हो जाते हैं। हालांकि, महज 2500 लोगों की आबादी वाले इस छोटे से शहर में प्रत्येक वर्ष परिंदों की मौत काफी विचित्र होने के साथ-साथ काफी हद तक अस्पष्ट भी है और जतिंगा पक्षियों के सुसाइट पॉइंट के रूप में पूरे देश में प्रसिद्ध है।

ये घटनाएं तब घटती है जब नम और कोहरे-भरे मौसम में हवाएं दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर बहने लगती हैं। रात के अंधेरे में पक्षी रोशनी के आस-पास उड़ने लगते हैं। इस समय वे मदहोशी जैसी अवस्था में होते हैं जिसके कारण ये आसपास की चीजों से टकराकर मर जाते हैं। भारत सरकार ने इस गुत्थी को सुलझाने के लिए प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ डॉ. सेन गुप्ता को नियुक्त किया था।

डॉ. गुप्ता ने यहां लंबे समय तक अध्ययन करने के बाद कहा कि पक्षियों के इस असामान्य व्यवहार के पीछे मौसम और चुम्बकीय शक्तियों का हाथ है। उन्होंने बताया कि वर्षा के मौसम में जब कोहरा छाया हो और हवा चल रही हो, तब शाम के समय जतिंगा घाटी की चुम्बकीय स्थिति में तेजी से बदलाव आ जाता है।

इस परिवर्तन के कारण ही पक्षी असामान्य व्यवहार करते हैं और वे रोशनी की ओर आकर्षित होते हैं। अपने शोध के बाद उन्होंने यह सलाह दी कि ऐसे समय में रोशनी जलाने से बचा जाए। उनके इस सलाह पर अमल करने से यहां होने वाली पक्षियों की मौत में 40 फीसदी की कमी आई है।

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