टीबी रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग गंभीर

ख़बरें अभी तक: टीबी जानलेवा बीमारी है। नूंह जिला देश के उन जिलों में शामिल है ,जिनमें टीबी रोग के मरीजों की संख्या अधिक होने के साथ – साथ नीति आयोग के पिछड़े जिलों की सूचि में भी शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि वर्ष 2015 तक देश को टीबी मुक्त करना है। टीबी रोगियों को सरकार की स्कीमों का लाभ सही ढंग से मिल रहा है या नहीं मिल रहा है, इसे लेकर 14 सदस्यीय डॉक्टरों की टीम चार दिवसीय दौरे पर है। टीम को टीबी मुक्त नूंह बनाने के मिशन में कुछ खामियां मिली हैं, जिसकी रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। आरएनटीसीपी अभियान में जांच केंद्रों की टीम को नूंह में मिली है। एलटी की कमी की वजह से महज 3 जांच केंद्र ही काम कर रहे हैं।

जल्द ही यहां एलटी की नियुक्ति होगी। डीसी नूंह एवं सीएमओ नूह को रिपोर्ट देने के अलावा स्टेट टीबी सैल को रिपोर्ट जल्द ही सौंप दी जाएगी। टीम की अगुवाई कर रही उप निदेशक स्वास्थ्य विभाग सुषमा अरोड़ा ने कहा कि अभी मरीजों को खोजने और दवाई देने के साथ-साथ उनको मिलने वाली 500 रुपये की मदद के अलावा सूचना देने वाले लोगों को दी जाने वाली 500 रुपये की मदद ठीक से नहीं मिल पा रही है। उप निदेशक ने बताया कि नल्हड़ मेडिकल कालेज का उतना सहयोग स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिल रहा, जितना मिलना चाहिए। सुषमा अरोड़ा ने माना कि अभी सुधार की गुंजाईश है ,तभी टीबी जैसे खतरनाक बीमारी से लड़ा जा सकता हैं।

 

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